ख़ुशी
शुक्रवार, 28 नवंबर 2014
मन
हमें कोई संतुष्ट नहीं कर सकता, मुझे तो लगता है ईश्वर भी नहीं !
क्योंकि हमारा मन भटकता है सुनता सबकी है पर करता अपने मन की है! हम किसी चर्चा में हो या गोष्ठी में , सुनते हम ध्यान से हैं और ऐसे लगता है मानो आज से ही हम चर्चित बात मान लेंगे या फिर उन सुनी बातों को जीवन में उतार लेंगे लेकिन व्यवहारिक जीवन में आते ही न जाने हमारी सोच को क्या हो जाता है कि गिरगिट भी शरमा जाये हमारे रंग बदलने की कला से।जीवनयापन, अपनी इच्छाओं की पूर्ति करने और आगे निकलने की अंधी दौड़ में सब कुछ भूला कर अपने आपको झोंक देते हैं !
क्योंकि हमारा मन भटकता है सुनता सबकी है पर करता अपने मन की है! हम किसी चर्चा में हो या गोष्ठी में , सुनते हम ध्यान से हैं और ऐसे लगता है मानो आज से ही हम चर्चित बात मान लेंगे या फिर उन सुनी बातों को जीवन में उतार लेंगे लेकिन व्यवहारिक जीवन में आते ही न जाने हमारी सोच को क्या हो जाता है कि गिरगिट भी शरमा जाये हमारे रंग बदलने की कला से।जीवनयापन, अपनी इच्छाओं की पूर्ति करने और आगे निकलने की अंधी दौड़ में सब कुछ भूला कर अपने आपको झोंक देते हैं !
गुरुवार, 30 अक्टूबर 2014
सोमवार, 27 अक्टूबर 2014
शनिवार, 9 अगस्त 2014
राखी
लो फिर आया राखी का त्यौहार
सज गया राखियों का हॉट-बाजार !
सुंदर -सुंदर, रंग- बिरंगी ,नीली ,पीली सुनहरी
सुंदर -सुंदर, रंग- बिरंगी ,नीली ,पीली सुनहरी
भाई के हाथ पर बँधने को राखी है तैयार !
सजी -सवँरी ,रंग- बिरंगी पोशाकों में
बहने भाई के घर जाने को भी तैयार !
बहने भाई के घर जाने को भी तैयार !
धागे ये प्यार के- बने हैं प्यार से
बांधे जाते हैं प्यार से -प्यार के बंधन में !
दुआं है मेरी सभी भाइयों के लिए
प्यार का ये अटूट बंधन सदा मजबूत होता रहे
भाई -बहन का पवित्र रिश्ता यूं ही बस चलता रहे !!!
''राखी की बधाई और शुभकामनायेँ ''
गुरुवार, 7 अगस्त 2014
मन के रिश्ते.
मन से मन के होते हैं कुछ रिश्ते,
सच्चाइयों की गहराइयों तक होते हैं कुछ रिश्ते.
मगर,
सच्चाई की जिसको समझ नहीं,
गहराई तक जिसकी पहुँच नहीं,
जाने क्या वो , वो क्या समझें,
मन से मन के ये रिश्ते.
सच्चाइयों की गहराइयों तक होते हैं कुछ रिश्ते.
मगर,
सच्चाई की जिसको समझ नहीं,
गहराई तक जिसकी पहुँच नहीं,
जाने क्या वो , वो क्या समझें,
मन से मन के ये रिश्ते.
सोमवार, 4 अगस्त 2014
बारिश की बूंदे
बारिश की बूंदे झूम -झूम के बरस रही हैं
मिज़ाज़ आसमाँ का बदला
रुत ने भी रुख बदला
नई फ़िजा है आई,
धरती फिर से महकी -सजी- सवँरी है !
बारिश की बूंदे तन - मन को भी भिगोने लगी
मन मचलने लगा है--- भीगने कोआस बढ़ने लगी है
प्यास बढ़ने लगी है --पिया मिलन को
पर ये क्या -----
गिरती हुई बूंदों पर नज़र डाली
.ये बूंदे तो आंसू हैं ,बरसते मोती
--------मूल्य है इनका बेहपनाह
दिल घबरा सा गया
मौसम के बहाने
दिल में बिजली दौड़ी थी पर यह आंसू तन - मन को भिगो गए !!!
शुक्रवार, 25 जुलाई 2014
जिन्दगी की खूबसूरती
जिन्दगी की असली खूबसूरती ये नहीं है कि आप कितने खुश है, जिन्दगी की असली खूबसूरती तो ये है कि आपसे कितने खुश है !अपनों से छोटी छोटी बातों पर नाराज़ ना होकर, बड़ा दिल रख कर मुस्करा कर उन्हें अपना लेना चाहिए क्योंकि :
"रोने से आंसू भी पराये हो जाते है और मुस्कराने से पराये भी अपने हो जाते है"
"रोने से आंसू भी पराये हो जाते है और मुस्कराने से पराये भी अपने हो जाते है"
गुरुवार, 24 जुलाई 2014
मंगलवार, 3 जून 2014
नया अध्याय
जीवन का नया अध्याय शुरु होने जा रहा है ! मन अति प्रफुलित हो रहा है पर डर और घबराहट भी हो रही है
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