ए सी पंखे पड़े हैं आँख मूंदे
बर्फ को भी लग गई ठंड
निकल आये हैं मोटे कम्बल,भारी रजाई
जो पड़े रहते थे संदूक में।
हाथ से बुने स्वेटर भी
फूले खुशी से
दुबके हुए थे जो टोपी कनटोप शाल मफलर... हो गया उनका भी श्रृंगार।
धूप हो गई गायब
ठिठुरन से भरा है माहौल और
सेंक रहे सभी अलाव .....
#दिल्ली की सर्दी