अनकहे एहसास
'एहसासों को शब्दों में पिरोने की कोशिश '
ख़ुशी
सोमवार, 29 अगस्त 2016
मां
📝हर औरत के पल्लू की गाँठ---- मां और मायका
न तो ये निकलती है और न ही कभी ढीली पड़ती है
कड़ी धूप में ठंडी छाँव है माँ ---
बुधवार, 17 अगस्त 2016
चश्मा
📝अपने-अपने चश्मे पहन रखे हैं ---
अपने-अपने नजरिये से हम सब देखते हैं --
---अपना-अपना सच !
साझां करें..... चश्मा......
तब शायद साफ दिखाई दे-एक-दूसरे का नजरिया
और दिखे सच!
#मनकीबात
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