अनकहे एहसास
'एहसासों को शब्दों में पिरोने की कोशिश '
ख़ुशी
सोमवार, 29 अगस्त 2016
मां
📝हर औरत के पल्लू की गाँठ---- मां और मायका
न तो ये निकलती है और न ही कभी ढीली पड़ती है
कड़ी धूप में ठंडी छाँव है माँ ---
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
नई पोस्ट
पुरानी पोस्ट
मुख्यपृष्ठ
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें