ख़ुशी

ख़ुशी

शुक्रवार, 12 फ़रवरी 2016

दिखावा

📝दुनियादारी बदल गयी है सब दिखावा हो चुका है !ज़माने के साथ बदलाव ठीक है, पर ज्यादा दिखावा,इतना भी अच्छा नहीं।
आज आप कितने भी स्मार्ट क्यों ना हो पर आपने चलन के हिसाब से कपड़े नहीं पहने तो......
ये भी सच है आज का कि पैरो से सर तक ब्रांड है तो लोग आपको देखेंगे वर्ना...............doesn't matterआप कौन हो, क्या हो,काले या गोरे हो! आज सबसे पहले हर किसी की नजर बंदे के चेहरे पर जाती है और उसके बाद नीचे पैरो पर...सब जगह शो होना जरुरी है ::और तो और अगर कान पर लगा फ़ोन महँगा नहीं तो...
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वो

📝दर्द को समेटे हुये रहती है वो
न जाने कहाँ से हिम्मत लाती है
न अपनों में कहना
न अपनों से सुनना
सीने में समा रखना 'उदासी'
जाने कहाँ से हिम्मत लाती है वो
ख़ुशियाँ आतीं भी हैं तो
नीरस बन कर ...
रस भरना,खोना,बनना 'मधु'
जाने कहाँ से हिम्मत लाती है वो....
#वो#

शुक्रवार, 5 फ़रवरी 2016

बगिया के फूल

📝यादों की कोंपलें फूट आईं हैं
ख़्वाबों की कलियाँ खिलने लगीं हैं 
शाख़ों पर तस्वीरें नज़र आने लगी हैं 
फिर आया मौसम खिलने -खिलाने का
‪#‎बगिया‬ के फूल#