बारिश की बूंदे झूम -झूम के बरस रही हैं
मिज़ाज़ आसमाँ का बदला
रुत ने भी रुख बदला
नई फ़िजा है आई,
धरती फिर से महकी -सजी- सवँरी है !
बारिश की बूंदे तन - मन को भी भिगोने लगी
मन मचलने लगा है--- भीगने कोआस बढ़ने लगी है
प्यास बढ़ने लगी है --पिया मिलन को
पर ये क्या -----
गिरती हुई बूंदों पर नज़र डाली
.ये बूंदे तो आंसू हैं ,बरसते मोती
--------मूल्य है इनका बेहपनाह
दिल घबरा सा गया
मौसम के बहाने
दिल में बिजली दौड़ी थी पर यह आंसू तन - मन को भिगो गए !!!

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