अनकहे एहसास
'एहसासों को शब्दों में पिरोने की कोशिश '
ख़ुशी
सोमवार, 27 अक्टूबर 2014
''ज़िंदगी''
हर सुबह एक पैगाम लाती है खुशबू भर कर हवा में संगीत सुनाती है इन खुशबुओं से महकती है जिंदगी
बस. ये ज़िंदगी दुनियाँ को भी महकाना चाहती
है
!
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