5.30बजे ही उठ गई ! सुबह से ही मन बेचैन परेशान था । सैर भी नहीं गई। बालकनी में उगते सूरज को देखने लगी । सोचा सुकून मिलेगा..... पर नहीं। घर के चक्कर लगाती रही । बेचैनी बढ़ती जा रही थी।
चाय पी और सुबह ही फोन किया पर बात न हो सकी।
अब दिन के काम शुरू हो गये और समय निकल गया। १० मिनट के काम में १/२ घंटा लग रहा था। काम में मन नहीं लग रहा था। पहली बार मेरे साथ हो रहा था समझ नहीं पा रही थी क्या चल रहा है ....क्या चाह रही हूं
......रोने का मन कर रहा था....पर क्यों.... .
इसी ऊहापोह में दो-तीन इधर-उधर फोन भी किये बात हुई तो रोई भी... मन हल्का हुआ।
त्योहार का दिन है.... ये सोचकर अगले दिन की तैयारी कर लूं ... हाथों पर उलटी सीधी लकीरें खींचने लगीं ..... कुलबुलाहट शुरू ....
मन की थकावट बहुत बढ़ गई थी।फिर फोन लगाया और बात न हो पाई ।
अब तो खीज गुस्सा चिड़चिड़ापन भी होने लगा ।
अंत में भगवान का ही सहारा होता है
मन की शांति के लिए ध्यान लगाया परंतु बेचैन मन को चैन नाही।
तुलसी पर जोत जलाते हुए मन की शांति की प्रार्थना की और ....बस फोन आ गया......
सब शांत कुलबुलाहट बेचैनी अंतर्द्वंद्व समाप्त...
#मां
शून्य में विलीन हो गई......🙏🙏🙏
ख़ुशी
मंगलवार, 3 नवंबर 2020
अंतर्द्वंद्व
सोमवार, 17 फ़रवरी 2020
मंगलवार, 31 दिसंबर 2019
बुधवार, 21 अगस्त 2019
शनिवार, 25 मई 2019
गुरुवार, 18 अप्रैल 2019
अटपटा सच
✍🏻"मैं तुम्हें नहीं भूल सकती/सकता"
------ये अटपटा सच है----मेरे विचार
...क्यूं है ना...
क्योंकि ना ऐसी कोई बात,समय,दृश्य, कहानी,ना ही कोइ इंसान और ना ऐसी कोइ चीज है जिसे हम नहीं भूल सकते। जब तक इनमें से कोई हमारी नजरों के सामने होता है तब तक उसका प्रभाव हमपर रहता है।नजरों से ओझल होते ही उसका प्रभाव भी धीरे धीरे कम होने लगता है।या फिर कुछ नया आ / हो जाता है !
इसलिए जब कोइ कहता है,मैं तुम्हें नहीं भूल सकता, तो ये बस बाँधे रखने का एक बहाना मात्र है,जब तक उसे आपकी जरूरत है ........
इसलिए अगर संबंधों में रहना है तो और बहुत से वजहों से रहिए,ना कि सिर्फ इसलिए क्योंकि "आप उसे नहीं भूल सकते!"
------ये अटपटा सच है----मेरे विचार
...क्यूं है ना...
क्योंकि ना ऐसी कोई बात,समय,दृश्य, कहानी,ना ही कोइ इंसान और ना ऐसी कोइ चीज है जिसे हम नहीं भूल सकते। जब तक इनमें से कोई हमारी नजरों के सामने होता है तब तक उसका प्रभाव हमपर रहता है।नजरों से ओझल होते ही उसका प्रभाव भी धीरे धीरे कम होने लगता है।या फिर कुछ नया आ / हो जाता है !
इसलिए जब कोइ कहता है,मैं तुम्हें नहीं भूल सकता, तो ये बस बाँधे रखने का एक बहाना मात्र है,जब तक उसे आपकी जरूरत है ........
इसलिए अगर संबंधों में रहना है तो और बहुत से वजहों से रहिए,ना कि सिर्फ इसलिए क्योंकि "आप उसे नहीं भूल सकते!"
बुधवार, 17 अप्रैल 2019
विचार
यह विचार पढ़ा तो मन को भा गया ------ करके देखें ----- सच बचपन याद आ गया
हर रात सोने से पहले अपने बिस्तर पर बैठें और मुंह बनाना शुरू करें। ठीक वैसे ही जैसे छोटे बच्चे करते हैं और उसका आनंद लेते हैं। तरह-तरह के चेहरे: अच्छे बुरे, सुंदर,कुरूप, ताकि पूरा चेहरा और मांसपेशियां हिलने लगें। आवाजें निकालें, निरर्थक आवाजें। फिर दस पंद्रह मिनट के लिए झूमें, शरीर को हिलाएं। और फिर सो जाएं।
सुबह स्नान करने से पहले फिर आईने के सामने खड़े हों और फिर से मुंह बनाएं। आईने के सामने खडे हो और देखें और मज़ा लें।
गुरुवार, 4 अप्रैल 2019
शनिवार, 21 जुलाई 2018
बारिश
📝जाने का नाम न ले रही ..........
हफ्ते भर से आई है पर थमने का नाम नहीं
लबालब भर रहीं हैं दिल की नदियां
उफन रहे है मन के नाले
फीका पड़ रहा झूलों का मज़ा
न सावन का पता न आषाढ़ का
हां, तेरे आने की खुशी में हरियाली की दावत बहुत बढ़िया है
खुशी है मज़ा है वैसे ही रहने दे
#बेटियां मायके में आती जाती ही अच्छी लगती हैं
.....
#पुणेबारिश
हफ्ते भर से आई है पर थमने का नाम नहीं
लबालब भर रहीं हैं दिल की नदियां
उफन रहे है मन के नाले
फीका पड़ रहा झूलों का मज़ा
न सावन का पता न आषाढ़ का
हां, तेरे आने की खुशी में हरियाली की दावत बहुत बढ़िया है
खुशी है मज़ा है वैसे ही रहने दे
#बेटियां मायके में आती जाती ही अच्छी लगती हैं
.....
#पुणेबारिश
शुक्रवार, 20 जुलाई 2018
रिश्ते
✍️मुझे कई फूलों के नाम नहीं पता ..पर उनकी खूबसूरती और खुशबू के बारे में जानती हूं .. मोगरा,अमलतास,गुलमोहर ये नाम हैंबाद में पर पहचान बहुत पहले से है।
शायद ऐसे ही नामी बेनामी लोग नाम वाले रिश्तों का भी मेरे आस-पास एक दायरा है जिसकी खुशबू व खूबसूरती मुझे महका रही है।
..(पर हमे दायरे में रहना गंवारा ही नहीं)
रिश्ते खूबसूरत होते हैं ..अजनबियों से ये रिश्ते मुझे अजीज लगते हैं।
शायद ऐसे ही नामी बेनामी लोग नाम वाले रिश्तों का भी मेरे आस-पास एक दायरा है जिसकी खुशबू व खूबसूरती मुझे महका रही है।
..(पर हमे दायरे में रहना गंवारा ही नहीं)
रिश्ते खूबसूरत होते हैं ..अजनबियों से ये रिश्ते मुझे अजीज लगते हैं।
गुरुवार, 19 जुलाई 2018
गुरुवार, 26 अप्रैल 2018
शब्द
काग़ज कलम साथ तो ले कर चले थे हम।
कभी कह न पाए तो कभी लिख न पाये हम
गहरा नाता है काग़ज कलम और हमारा।
शुक्रवार, 9 दिसंबर 2016
सोमवार, 29 अगस्त 2016
बुधवार, 17 अगस्त 2016
गुरुवार, 30 जून 2016
मन परिन्दा
📝बदला हुआ समां है बदला हुआ है मन
कुछ बदला हुआ दिल भी है बदली हुई धड़कन भी
नई सी चाह भी है कुछ नये अरमान भी
ख्वाबों को जी लेने की चाह भीहै तो इक तड़पन भी
उड़ने को मन परिन्दा बेताब है........
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नई सी चाह भी है कुछ नये अरमान भी
ख्वाबों को जी लेने की चाह भीहै तो इक तड़पन भी
उड़ने को मन परिन्दा बेताब है........
शुक्रवार, 12 फ़रवरी 2016
दिखावा
📝दुनियादारी बदल गयी है सब दिखावा हो चुका है !ज़माने के साथ बदलाव ठीक है, पर ज्यादा दिखावा,इतना भी अच्छा नहीं।
आज आप कितने भी स्मार्ट क्यों ना हो पर आपने चलन के हिसाब से कपड़े नहीं पहने तो......
ये भी सच है आज का कि पैरो से सर तक ब्रांड है तो लोग आपको देखेंगे वर्ना...............doesn't matterआप कौन हो, क्या हो,काले या गोरे हो! आज सबसे पहले हर किसी की नजर बंदे के चेहरे पर जाती है और उसके बाद नीचे पैरो पर...सब जगह शो होना जरुरी है ::और तो और अगर कान पर लगा फ़ोन महँगा नहीं तो...
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ये भी सच है आज का कि पैरो से सर तक ब्रांड है तो लोग आपको देखेंगे वर्ना...............doesn't matterआप कौन हो, क्या हो,काले या गोरे हो! आज सबसे पहले हर किसी की नजर बंदे के चेहरे पर जाती है और उसके बाद नीचे पैरो पर...सब जगह शो होना जरुरी है ::और तो और अगर कान पर लगा फ़ोन महँगा नहीं तो...
वो
📝दर्द को समेटे हुये रहती है वो
न जाने कहाँ से हिम्मत लाती है
न अपनों में कहना
न अपनों से सुनना
सीने में समा रखना 'उदासी'
जाने कहाँ से हिम्मत लाती है वो
ख़ुशियाँ आतीं भी हैं तो
नीरस बन कर ...
रस भरना,खोना,बनना 'मधु'
जाने कहाँ से हिम्मत लाती है वो....
#वो#
न जाने कहाँ से हिम्मत लाती है
न अपनों में कहना
न अपनों से सुनना
सीने में समा रखना 'उदासी'
जाने कहाँ से हिम्मत लाती है वो
ख़ुशियाँ आतीं भी हैं तो
नीरस बन कर ...
रस भरना,खोना,बनना 'मधु'
जाने कहाँ से हिम्मत लाती है वो....
#वो#
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