ख़ुशी

ख़ुशी

गुरुवार, 30 जून 2016

मन

 मन एक खेत की तरह है जिसमें जब चाहे जैसी चाहे फसल लगा दो.... लहलहायेगी!!

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें