ख़ुशी

ख़ुशी

गुरुवार, 30 जून 2016

मन परिन्दा

📝बदला हुआ समां है बदला हुआ है मन
कुछ बदला हुआ दिल भी है बदली हुई धड़कन भी
नई सी चाह भी है कुछ नये अरमान भी
ख्वाबों को जी लेने की चाह भीहै तो इक तड़पन भी
उड़ने को मन परिन्दा बेताब है........
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मन

 मन एक खेत की तरह है जिसमें जब चाहे जैसी चाहे फसल लगा दो.... लहलहायेगी!!

शुक्रवार, 12 फ़रवरी 2016

दिखावा

📝दुनियादारी बदल गयी है सब दिखावा हो चुका है !ज़माने के साथ बदलाव ठीक है, पर ज्यादा दिखावा,इतना भी अच्छा नहीं।
आज आप कितने भी स्मार्ट क्यों ना हो पर आपने चलन के हिसाब से कपड़े नहीं पहने तो......
ये भी सच है आज का कि पैरो से सर तक ब्रांड है तो लोग आपको देखेंगे वर्ना...............doesn't matterआप कौन हो, क्या हो,काले या गोरे हो! आज सबसे पहले हर किसी की नजर बंदे के चेहरे पर जाती है और उसके बाद नीचे पैरो पर...सब जगह शो होना जरुरी है ::और तो और अगर कान पर लगा फ़ोन महँगा नहीं तो...
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वो

📝दर्द को समेटे हुये रहती है वो
न जाने कहाँ से हिम्मत लाती है
न अपनों में कहना
न अपनों से सुनना
सीने में समा रखना 'उदासी'
जाने कहाँ से हिम्मत लाती है वो
ख़ुशियाँ आतीं भी हैं तो
नीरस बन कर ...
रस भरना,खोना,बनना 'मधु'
जाने कहाँ से हिम्मत लाती है वो....
#वो#

शुक्रवार, 5 फ़रवरी 2016

बगिया के फूल

📝यादों की कोंपलें फूट आईं हैं
ख़्वाबों की कलियाँ खिलने लगीं हैं 
शाख़ों पर तस्वीरें नज़र आने लगी हैं 
फिर आया मौसम खिलने -खिलाने का
‪#‎बगिया‬ के फूल#

शनिवार, 23 जनवरी 2016

अकेलापन

 📝अक्सर अकेलेपन का बोझ भी बढ़ता ही चला जा रहा था शाम काट खाने को दौड़ती थी ......
जिनका कोई वजूद न था,वो ही हम पर भावी होने लगे !
.... अब तो ; अकेलापन दोस्त बनता जा रहा है! हमें हरतरह के तौर-तरीको से लेकर इंसान  की पहचान तक कराना सिखाने  लग गया है ।
.. देखा
फिर--------
Life में कुछ भी हो सकता है ..
...दीवारें दोस्त हो गई शामें बात करने लगींऔर अकेलापन सलाहकार.....
सलाह यह.... अपना शौक़ पूरा करो ....  सपने बुनो.... यादें संजो डालो ....

गुरुवार, 21 जनवरी 2016

सर्दी



कुछ दिन पहले सर्दी रानी को निमन्त्रण भेजा था:

हेसर्दी रानी .......कहाँ गुम हो गई तू
न कोई ख़ैर-ख़बर न कोई संदेश
कहाँ छुप गई तू .....ढूढों रे ढूढों.....
न कोहरा न पाला
न भावे धूप, नसुहाये गर्म कपड़े
रज़ाई की गुदगुदी में भी चैन न आवे
दिस्मबर निकला जनवरी आया
पर अबके तू न आई!
याद तेरी बहुत सताये ... मान जा. कुछ दिनों के लिये ही आजा.......
अब स्वागत है सर्दी का::::
हे सर्दी रानी
आ हीं गई
! सुस्वागतम् !
भाव खा रही थी न ...
रहा नहीं गया न...
दनदनाती हुई,मोटा सा बादलों का शॉल ओढ़े हुये,
नाराज़ कर,सूरज को मजबूर होकर आ ही गई हो तो
.......कुछ दिन रह जाना
समय और मौसम की माँग है ........ हम तो क़ायल हैं ही