📝अक्सर अकेलेपन का बोझ भी बढ़ता ही चला जा रहा था शाम काट खाने को दौड़ती थी ......
जिनका कोई वजूद न था,वो ही हम पर भावी होने लगे !
.... अब तो ; अकेलापन दोस्त बनता जा रहा है! हमें हरतरह के तौर-तरीको से लेकर इंसान की पहचान तक कराना सिखाने लग गया है ।
.. देखा
फिर--------
Life में कुछ भी हो सकता है ..
...दीवारें दोस्त हो गई शामें बात करने लगींऔर अकेलापन सलाहकार.....
सलाह यह.... अपना शौक़ पूरा करो .... सपने बुनो.... यादें संजो डालो ....
जिनका कोई वजूद न था,वो ही हम पर भावी होने लगे !
.... अब तो ; अकेलापन दोस्त बनता जा रहा है! हमें हरतरह के तौर-तरीको से लेकर इंसान की पहचान तक कराना सिखाने लग गया है ।
.. देखा
फिर--------
Life में कुछ भी हो सकता है ..
...दीवारें दोस्त हो गई शामें बात करने लगींऔर अकेलापन सलाहकार.....
सलाह यह.... अपना शौक़ पूरा करो .... सपने बुनो.... यादें संजो डालो ....
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