हे सर्दी रानी .......कहाँ गुम हो गई तू
न कोई ख़ैर-ख़बर न कोई संदेश
कहाँ छुप गई तू .....ढूढों रे ढूढों.....
न कोहरा न पालान भावे धूप, नसुहाये गर्म कपड़े
रज़ाई की गुदगुदी में भी चैन न आवे
दिस्मबर निकला जनवरी आया
पर अबके तू न आई!
याद तेरी बहुत सताये ... मान जा. कुछ दिनों के लिये ही आजा........
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