📝यादों की कोंपलें फूट आईं हैं
ख़्वाबों की कलियाँ खिलने लगीं हैं
शाख़ों पर तस्वीरें नज़र आने लगी हैं
फिर आया मौसम खिलने -खिलाने का
ख़्वाबों की कलियाँ खिलने लगीं हैं
शाख़ों पर तस्वीरें नज़र आने लगी हैं
फिर आया मौसम खिलने -खिलाने का
#बगिया के फूल#





