अनकहे एहसास
'एहसासों को शब्दों में पिरोने की कोशिश '
ख़ुशी
शनिवार, 13 जून 2015
यादें
वो मीठी -मीठी सी सुबह,
बादलों से घिरे पहाड़ ,
ठंडी ठंडी फुहार, सफ़ेद धुँध की चादर
मनमोहक द्रश्य
दार्जिलिंग की पहाड़ियों का
अक्सर कभी कभी वो पल याद आ जाते हैं जो यादों को झँझोड़ जाते हैं एक प्यारा सा एहसास दे जाते हैं।
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